Thursday, June 20, 2013

सिलसिला जख्म जख्म जारी है,

सिलसिला जख्म जख्म जारी है,

ये ज़मीं दूर तक हमारी है |

कूचे कुचे से नाता है मेरा,

ज़र्रे ज़र्रे से रिश्तेदारी है||

रेत के मकान ढह गये देखो,

बारिशों के खुलूष जारी है|

कोई गुज़ार के देखे दोस्तों,

जो ज़िन्दगी हमने गुजारी है||

डॉ.पंकज मिश्र 

Thursday, June 6, 2013

ज़वानी

आई इधर बहारें जवानी उधर गयी,
बर्बाद करने आयी थी बर्बाद कर गयी  |
जब वो चले थे छोड़ने तो उनपर नज़र गयी,
पलटे तो एक क़यामत सी गुज़र गयी ||
जब था मेरा शबाब तो मुझको नही था होश,
जब होश आगया तो ज़वानी गुज़र गयी |
ये बेवजह झुकी नही कमर मेरी ए सनम,
झुक झुक के खोजता हूँ ज़वानी किधर गयी ||

                                      ड़ा. पंकज मिश्रा

Tuesday, May 28, 2013

सुना है बहुत कुछ कहने लगे हैं लोग

सुना है बहुत कुछ कहने लगे हैं लोग ,
हमसे कहते हैं की अब बदलने लगे हैं लोग |
इन सुर्ख हवाओं में खुसबू है तेरी सांसो की,
इस मीठी ठंडक में एहसास है तेरे होने का,
फिर भी कहते हैं की बेवफा होने लगे हैं लोग,
एहसास होती है तन्हाइयां जब रातों को,
नज़र आता है वो मंज़र हमारी आँखों में,
फिर भी कहते हैं की भूलने लगे हैं लोग
सुना है बहुत कुछ कहने लगे हैं लोग ,
हमसे कहते हैं की अब बदलने लगे हैं लोग ||


                 डा. पंकज मिश्रा

Monday, December 3, 2012

ज़िन्दगी इन पलों को फिर से नहीं दोहराएगी

एक  दिन ज़िन्दगी  ऐसे  मुकाम  पे  पहुँच  जायेगी ...
दोस्ती तो  सिर्फ  यादों  में  रह  जाईगी ....
हर  कप  कॉफ़ी याद  दोस्तों  की  दिलायेगी ....
और  हँसते  हँसते  फिर  आँखें  नम हो  जायेगी ...
ऑफिस  के  चम्बर  में  क्लास रूम  नज़र  आयेगा ...
पर चाहने  पर  भी  प्रोक्सी  नहीं  लग  पायेगा ...
पैसे तो  बहुत  होंगे ...मगर  उन्हें  लुटाने  की  वजह  ही  खो  जायेगी ...
जी  ले  खुलके  इस  पल  को  मेरे  दोस्त  क्यूंकि  ज़िन्दगी  इन  पलों को  फिर  से नहीं दोहराएगी // 

Sunday, November 18, 2012

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,

अपने दिल को पत्थर का बना कर रखना ,
हर चोट के निशान को सजा कर रखना ।

उड़ना हवा में खुल कर लेकिन ,
अपने कदमों को ज़मी से मिला कर रखना ।

छाव में माना सुकून मिलता है बहुत ,
फिर भी धूप में खुद को जला कर रखना ।

उम्रभर साथ तो रिश्ते नहीं रहते हैं ,
यादों में हर किसी को जिन्दा रखना ।

वक्त के साथ चलते-चलते , खो ना जाना ,
खुद को दुनिया से छिपा कर रखना ।

रातभर जाग कर रोना चाहो जो कभी ,
अपने चेहरे को दोस्तों से छिपा कर रखना ।

तुफानो को कब तक रोक सकोगे तुम ,
कश्ती और मांझी का याद पता रखना ।

हर कहीं जिन्दगी एक सी ही होती हैं ,
अपने ज़ख्मों को अपनो को बता कर रखना ।

मन्दिरो में ही मिलते हो भगवान जरुरी नहीं ,
हर किसी से रिश्ता बना कर रखना ।

मरना जीना बस में कहाँ है अपने ,
हर पल में जिन्दगी का लुफ्त उठाये रखना ।

दर्द कभी आखरी नहीं होता ,
अपनी आँखों में अश्को को बचा कर रखना ।

सूरज तो रोज ही आता है मगर ,
अपने दिलो में ' दीप ' को जला कर रखना

मुझको गलफ़त से डरना छोड़ दे,

मुझको गलफ़त से डरना छोड़ दे,
यूँ दबे तू पांव आना छोड़ दे.
 
तुझ पर भी कीचड़ उछालेगा जहाँ,
गैरों पर ऊँगली उठाना छोड़ दे.

शोले बनते हैं कभी चिंगारियां,
यूँ ग़मों को दिल में छुपाना छोड़ दे.

कुछ दिलों को ठेस भी लगती है दोस्त,
हर घडी का मुस्कुराना छोड़ दे.
 
जाने वाले लौट कर आते नहीं,
दिन रात का आंसू बहाना छोड़ दे.

- डॉ.पंकज मिश्र

मत करना.

कभी मेरे दमन को दागदार मत करना ,
बेवफाई करना मगर दिल तार - तार मत करना
 
सिमटना हो तो सिमट जाओ किसी की पलकों में ,
बिखर जाओगे फिर एतराज मत करना.

वो,मंजिल नहीं मुसाफ़िर है तेरी राहों का,
किसी मुसाफ़िर पर कभी एतबार मत करना,

बस एक शाम मेरे संग गुजरिये तो सही,
तब कहोगे की अबकी शाम ढलने की शाम मत रखना II

                                                       - डॉ . पंकज मिश्र