Thursday, July 19, 2018

अंतरमन सच बोलेगा.......

घनघोर अंधेरा छाये जब
कोई राह नज़र ना आये जब
कोई तुमको फिर बहकाये जब
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा..........

जब लम्हा-लम्हा 'आरी' हो
और ग़म खुशियों पे भारी हो
दिल मुश्किल में जब पड़ जाये
कोई तीर सोच की 'अड़' जाये
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

जब सच-झूठ में फर्क ना हो
जब गलत-सही में घिर जाओ
तुम नज़र में अपनी गिर जाओ
इस बात पे थोड़ी देर तलक
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम-तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा........

ये जीवन एक छाया है
दुख, दर्द, मुसीबत माया है
दुनिया की भीड़ में खोने लगो
तुम खुद से दूर होने लगो
तुम आँखें अपनी बंद करना
और अंतरमन की सुन लेना
मुमकिन है हम तुम झूठ कहें
पर अंतरमन सच बोलेगा ......।

Wednesday, July 11, 2018

ll नई ग़ज़ल ll

ये और बात, दूर रहे मंज़िलों से हम,
बच कर चले हमेशा मगर रहबरों से हम.

मंज़िल की है तलब तो हमें साथ ले चलो,
वाकिफ़ हैं ख़ूब राह की बारीकियों से हम.

कुछ तो हमारे बीच कभी दूरियाँ भी हों,
तंग आ गए हैं रोज़ की, नज़दीकियों से हम.

गुज़रें हमारे घर की किसी रहगुज़र से वो,
परदें हटाएँ, देखें उन्हें खिड़कियों से हम.

जब भी कहा के- 'याद हमारी कहाँ उन्हें ?'
पकड़े गए हैं ठीक तभी, हिचकियों से हम.

जिनके परों पे सुबह की ख़ुशबू के रंग हैं,
बचपन उधार लाए हैं उन तितलियों से हम.

Aalok Shrivastav

चाय!!

एक तेरा ख़्याल ही तो है मेरे पास...

वरना कौन अकेले में बैठे कर चाय पीता है...!!!

आज लफ्जों को मैने शाम की चाय पे बुलाया है...

बन गयी बात तो ग़ज़ल भी हो सकती है...!!!

ठान लिया था कि अब और नहीं पियेगें चाय उनके हाथ की...

पर उन्हें देखा और लब बग़ावत कर बैठे...!!!

मिलो कभी चाय पर फिर क़िस्से बुनेंगे...

तुम ख़ामोशी से कहना हम चुपके से सुनेंगे...!!!

चाय के कप से उड़ते धुंए में मुझे तेरी शक़्ल नज़र आती है...

तेरे इन्ही ख़यालों में खोकर, मेरी चाय अक्सर ठंडी हो जाती है...!!!

हलके में मत लेना तुम सावले रंग को...

दूध से कहीं ज्यादा देखे है मैंने शौक़ीन चाय के...!!!

~ Unknown

चाय पियेंगे?

जब कोई पूछता है "चाय पियेंगे..?"

तो  बस नहीं पूछता वो तुमसे
दूध ,चीनी और चायपत्ती
को उबालकर बनी हुई एक कप  चाय के लिए।

वो पूछता है ...
क्या आप बांटना चाहेंगे
कुछ चीनी सी मीठी यादें
कुछ चायपत्ती सी कड़वी
दुःख भरी बातें..?

वो पूछता है..
क्या आप चाहेंगे
बाँटना मुझसे अपने कुछ
अनुभव ,मुझसे कुछ आशाएं
कुछ नयी उम्मीदें..?

उस एक प्याली चाय के
साथ वो बाँटना चाहता हैं..
अपनी जिंदगी के वो पल
तुमसे ..जो "अनकही" है अब तक
वो दास्ताँ ..जो "अनसुनी" है अब तक.....

वो कहना चाहता है ..
तुमसे ..तमाम किस्से
जो सुना नहीं पाया अपनों
को कभी ..

एक प्याली चाय
के साथ को अपने उन टूटे
और खत्म हुए ख्वाबों को
एक और बार जी लेना
चाहता है।

वो उस गर्म चाय
के प्याली के साथ उठते हुए धुओँ के साथ
कुछ पल को अपनी
सारी फ़िक्र उड़ा देना चाहता है।

वो कर लेना चाहता है
अपने उस एक नजर वाले हुए
प्यार का इजहार ,
तो कभी उस शिद्दत से  की
गयी मोहब्बत का इकरार..

कभी वो देश की
राजनीतिक स्थिति से
अवगत कराना चाहता है
तुम्हें..
तो कभी बताना चाहता है
धर्म और मंदिरों के
हाल चाल..

इस दो कप चाय के
साथ शायद इतनी बातें
दो अजनबी कर लेते हैं
जितनी कहा सुनी तो
अपनों के बीच भी नहीं हो पाती।

तो बस जब पुछे कोई
अगली बार तुमसे
"चाय पियेंगे..?"

तो हाँ कहकर बाँट लेना उसके साथ
अपनी चीनी सी मीठी यादें
और चायपत्ती सी कड़वी दुख भरी  बातें..!!

चाय पियेंगे?

इंसान जाने कहां खो गये हैं !

जाने क्यूं अब शर्म से,
चेहरे गुलाब नही होते।
जाने क्यूं अब मस्त मौला
मिजाज नही होते।

पहले बता दिया करते थे,
दिल की बातें।
जाने क्यूं अब चेहरे
खुली किताब नही होते।

सुना है बिन कहे
दिल की बात समझ लेते थे।
गले लगते ही
दोस्त हालात समझ लेते थे।

तब ना व्हाटसप
ना स्मार्ट मोबाइल था l
ना फेसबुक
ना ट्विटर अकाउंट था l

एक शब्द से ही
वक़्त का मिज़ाज़ समझ लेते थे l
एक चिट्टी से ही
दिलों के जज्बात समझ लेते थे।

सोचता हूं
हम कहां से कहां आ गये l
प्रेक्टीकली सोचते सोचते
भावनाओं को खा गये।

अब भाई भाई से
समस्या का समाधान कहां पूछता है l
अब बेटा बाप से
उलझनों का निदान कहां पूछता है l
बेटी नही पूछती
मां से गृहस्थी के सलीके l
अब कौन गुरु के
चरणों में बैठकर ज्ञान की परिभाषा सीखे।

परियों की बातें
अब किसे भाती है l
अपनो की याद
अब किसे रुलाती है l

अब कौन
गरीब को सखा बताता है l
अब कहां
कृष्ण सुदामा को गले लगाता है l

जिन्दगी मे
हम प्रेक्टिकल हो गये हैं
मशीन बन गये है सब
इंसान जाने कहां खो गये हैं !

Unknown